(लखनऊ, UP)08सितम्बर,2025.
मिर्जापुर का मां विंध्याचल धाम प्रदेश का बड़ा पर्यटन स्थल बनकर उभर रहा है। काशी और अयोध्या की तरह ही मां विंध्यवासिनी मंदिर में साल भर काफी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। अनुमान है कि इस साल मंदिर में आने वाले दर्शनार्थियों की संख्या 01 करोड़ पहुंच जाएगी। इस साल के शुरुआती छह महीनों में ही 64 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने मंदिर में दर्शन किए हैं। यानी हर महीने औसतन 10 लाख श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। साल 2024 में यह आंकड़ा 78 लाख था। इसे देखते हुए पर्यटन विभाग यहां ईको टूरिज्म का भी विकास करने में लगा हुआ है।
पर्यटन व संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि तीर्थ यात्रियों की बढ़ती आमद से विंध्याचल त्रिकोण यात्रा (विंध्यवासिनी देवी मंदिर, अष्टभुजा मंदिर और काली खोह मंदिर) सहित जिले के अन्य प्रमुख स्थलों पर भी रौनक बढ़ी है। प्रदेश सरकार विंध्याचल को पर्यटन प्रतीक के रूप में स्थापित करने के लिए काम कर रही है। सरकार द्वारा विंध्याचल कॉरिडोर के साथ विभिन्न ईको टूरिज्म परियोजनाओं पर काम कर रही है।
उन्होंने बताया कि सरकार अष्टभुजा और कालीखोह मंदिर क्षेत्र का भी कॉरिडोर शैली में पुनर्विकास कर रही है। बेहतर कनेक्टिविटी के लिए सड़कों, घाटों और परिवहन सुविधाओं को उन्नत किया जा रहा है। मल्टी-लेवल पार्किंग, शौचालय, भीड़ प्रबंधन क्षेत्र और यात्री सुविधाएं तैयार हो रही हैं। गंगा तट पर नए घाट और पथ का निर्माण भी योजना में है। ताकि श्रद्धालु घाटों को जोड़ते हुए धार्मिक यात्रा कर सकेंगे। शाम की गंगा आरती को और भव्य बनाने के लिए भी विशेष मंच बनाए जा रहे हैं।
अब हर मौसम में पहुंच रहे श्रद्धालु
प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति मुकेश कुमार मेश्राम ने कहा कि पहले मानसून के मौसम में ही झरनों को देखने के लिए भीड़ उमड़ती थी। मौजूदा समय में वर्षभर श्रद्धालु और पर्यटक विंध्याचल पहुंच रहे हैं। जहां उन्हें धार्मिक और प्राकृतिक दोनों आकर्षण अपनी ओर खींच रहे हैं। विंध्याचल की पहाड़ियों और यहां के प्राकृतिक स्थलों को पर्यटन योजना में शामिल किया गया है। झरने, जंगलों और ट्रैकिंग पथों को विकसित कर पर्यटकों को नया अनुभव देने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीण होम-स्टे, नेचर वॉक, पारंपरिक हस्तशिल्प और स्थानीय व्यंजन भी पर्यटन का हिस्सा बन रहे हैं।
