(नई दिल्ली)21अक्टूबर,2025.
भारत वैश्विक सेवा निर्यात का एक प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के अधिकारियों ने कहा कि देश का सेवा निर्यात 14.8 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक दर (CAGR) से बढ़ रहा है। यह वस्तु निर्यात के 9.8 प्रतिसत से कहीं ज्यादा है। NSE ने इस प्रगति को देश में हो रहे सेवा क्षेत्रों में संरचनात्मक सुधारों, तकनीकी विकास, और जनसंख्या आधारित लाभों का परिणाम बताया है। यह देश के आर्थिक परिवर्तन को गति दे रहे हैं।
भारत ने वैश्विक सेवा निर्यात में सातवां स्थान हासिल किया
एनएसई के मुख्य अर्थशास्त्री तीर्थंकर पटनायक ने कहा कि भारत सेवाओं के क्षेत्र में वही स्थान बनाएगा, जो चीन विनिर्माण क्षेत्र में रखता है। यह सेवा निर्यात के वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है। भारत ने वैश्विक सेवा निर्यात में 4.3 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ अब दुनिया में सातवां स्थान हासिल कर लिया है। अधिकारियों ने बताया कि यह उपलब्धि मुख्य रूप से टेलीकॉम, आईटी और बिजनेस सेवाओं की बदौलत संभव हो पाई है। यह देश के कुल सेवा निर्यात का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा रखते हैं। एनएसई के अनुसार, अकेले टेक्नोलॉजी निर्यात ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में 200 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर लिया है।
वैश्विक क्षमता केंद्रों की संख्या में हुई वृद्धि
अधिकारियों ने बताया कि भारत अब वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसीएस) का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। वित्त वर्ष 2019 में जहां इनकी संख्या 1,430 थी, वहीं वित्त वर्ष 2024 में यह बढ़कर 1,700 हो गई है। अनुमान है कि वित्त वर्ष 30 तक यह संख्या 2,200 तक पहुंच सकती है। इन केंद्रों में अनुमानित 26 लाख पेशेवर कार्यरत होंगे। आंकड़ों के अनुसार, जीसीसी बाजार का आकार वित्त वर्ष 2019 के 40 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 30 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है।
इन महत्वपूर्ण कारणों ने देश की आर्थिक स्थिति को बढ़ावा दिया
अधिकारियों ने कहा कि देश की इस तेज आर्थिक प्रगति के पीछे कई महत्वपूर्ण संरचनात्मक और आर्थिक सुधार हैं, जिनमें जीएसटी, दिवालियापन और ऋण शोधन संहिता, रियल एस्टेट नियमन अधिनियम और कॉर्पोरेट टैक्स कटौती जैसे कदम शामिल हैं। उन्होंने बताया कि फेसलेस असेसमेंट,सरल श्रम कानून,और परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम जैसे उदारीकरण कदमों ने निवेशकों के विश्वास को और मज़बूत किया है। साथ ही,निजीकरण,वैश्वीकरण, बैंकों का विलय, विदेशी व्यापार समझौते, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में विस्तार, और यूपीआई का अंतरराष्ट्रीयकरण जैसे उपायों ने भारत की आर्थिक स्थिति को स्थायी रूप से मजबूत किया है।
सरकारी योजनाओं ने सामाजिक सुधार को बढ़ावा दिया
अधिकारियों ने कहा कि आर्थिक प्रगति के साथ-साथ सामाजिक सुधारों ने भी आम जनजीवन को पूरी तरह बदल दिया है।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 10 करोड़ से अधिक एलपीजी कनेक्शन
स्वच्छ भारत मिशन के तहत 12 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण
जन धन योजना के ज़रिए करोड़ों लोगों को औपचारिक बैंकिंग से जोड़ा गया
मजबूत आर्थिक वृद्धि का अनुमान
उन्होंने कहा कि भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.3% से 6.8% के बीच रहने का अनुमान है। साथ ही सांकेतिक (नॉमिनल) वृद्धि दर लगभग 12% रहने की उम्मीद है। इस रफ्तार से भारत 2027 तक जापान और जर्मनी को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।
बहुस्तरीय विकास रणनीति
NSE ने कहा कि भारत की विकास यात्रा को और गति देने के लिए एक समग्र रणनीति अपनाई जा रही है, जिसमें शामिल हैं:
निजी निवेश का विस्तार
MSMEs को सशक्त बनाना
शिक्षा और रोजगार के बीच की खाई को पाटना
ग्रीन फाइनेंस को बढ़ावा देना
कृषि-आधारित समावेशी विकास(साभार एजेंसी)
