मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को सचिवालय में राज्य की निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित रेल परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रस्तावित रेल परियोजनाओं में टनल के साथ बनने वाली एस्केप टनल को समानांतर सड़कों (पैरेलल रोड्स) के रूप में विकसित करने की व्यवस्था की जाए।
एस्केप टनल के उपयोग पर बने कार्ययोजना
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना में निर्मित एस्केप टनलों के भविष्य उपयोग पर कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन टनलों का उपयोग भविष्य में वैकल्पिक सड़क मार्ग के रूप में किया जा सकता है।
बैठक में जानकारी दी गई कि इस परियोजना का 72.5 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि टनल निर्माण का 95.30 प्रतिशत कार्य पूरा हो गया है। कुल 28 टनलों में 16 मुख्य टनल और 12 एस्केप टनल शामिल हैं।
कर्णप्रयाग से बागेश्वर तक विस्तार की संभावना
मुख्यमंत्री ने कर्णप्रयाग से बागेश्वर तक रेल लाइन के विस्तार की संभावना पर भी कार्य करने के निर्देश दिए। साथ ही टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन परियोजना पर तेजी लाने को कहा।
उन्होंने कहा कि परियोजना के विभिन्न वैकल्पिक मार्गों पर विचार किया जाए और अधिकतम क्षेत्र व जनता को लाभ मिले, इसके लिए अल्मोड़ा और सोमेश्वर क्षेत्र को भी जोड़ने की संभावनाएं तलाशी जाएं।
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने का आग्रह करने के निर्देश भी दिए, जिससे निर्माण कार्य को गति मिल सके।
रेलवे स्टेशनों के आसपास होगा पुनरविकास
मुख्यमंत्री ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग परियोजना के अंतर्गत प्रस्तावित रेलवे स्टेशनों के लिए इंटीग्रेटेड प्लान तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्टेशनों के आसपास स्थानीय लोगों के लिए बाजार विकसित किए जाएं तथा स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय उत्पादों की बिक्री के लिए विशेष प्रावधान किए जाएं।
साथ ही रेलवे स्टेशनों के आसपास स्थित गांवों, कस्बों, धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों के विकास के लिए रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने लोगों को स्वरोजगार, होमस्टे और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने पर भी बल दिया।
थीम आधारित बन रहे स्टेशन
परियोजना के अंतर्गत विभिन्न स्टेशनों का निर्माण अलग-अलग सांस्कृतिक और धार्मिक थीम पर किया जा रहा है। इनमें शिवपुरी, देवप्रयाग, श्रीनगर, धारी देवी, गौचर और कर्णप्रयाग सहित अन्य स्टेशन शामिल हैं, जिन्हें उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ा गया है।
बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन सहित वरिष्ठ अधिकारी और रेलवे विभाग के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे।
