अयोध्या:26 मार्च होगा “सूर्य तिलक”

Uttar Pradesh

(लखनऊ,UP)2मार्च,2026.

इस रामनवमी पर भी रामलला का सूर्य की किरणें अभिषेक करेंगी। राम मंदिर ट्रस्ट ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। रामनवमी मेला 19 मार्च से 26 मार्च तक आयोजित होगा। रामनवमी मेले में 20 से 25 लाख श्रद्धालु अयोध्या पहुंचते हैं। रामनवमी का मुख्य पर्व रामजन्मोत्सव 26 मार्च को मनाया जाएगा, इसी दिन रामलला का सूर्य तिलक भी होगा।

सूर्य तिलक की परंपरा 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने के बाद शुरू की गई थी। 2024 में रामजन्मोत्सव पर पहला सूर्य तिलक हुआ था। यह परंपरा 2025 में भी दोहराई गई और अब इस साल भी रामजन्मोत्सव को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। रामजन्मोत्सव पर राम मंदिर में नौ दिवसीय अनुष्ठान भी होगा। रामजन्मोत्सव के दिन ठीक 12 बजे जैसे ही रामलला का प्रतीकात्मक जन्म होगा, ठीक उसी समय सूर्य की किरणें रामलला का अभिषेक करेंगी। सीबीआरआई रुड़की की ओर से विकसित चार लेंस और चार दर्पणों के ऑप्टो-मैकेनिकल सिस्टम से सूर्य की किरणें सीधे रामलला के मस्तक पर पड़ेंगी।

वैज्ञानिकों की टीम 10 मार्च तक अयोध्या पहुंचेगी और सूर्य तिलक का ट्रायल करेगी। लेंस और दर्पणों का उपयोग कर सूर्य की किरणों को तीसरी मंजिल से गर्भगृह तक पहुंचाया जाएगा। लगभग 3 से 4 मिनट तक सूर्य तिलक प्रकाशित रहेगा। इस पूरे कार्यक्रम का लाइव प्रसारण करने की भी तैयारी है। इस योजना को लेकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सीबीआरआई रुड़की के साथ 10 वर्ष का अनुबंध किया है।

विहिप ने शुरू की रामोत्सव की तैयारी
विहिप की ओर से आयोजित होने वाले रामोत्सव की भी तैयारी शुरू हो गई है। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 19 मार्च से पूरे देश में रामोत्सव कार्यक्रम मनाएगा। 15 दिनों तक चलने वाले इस विशेष कार्यक्रम में विहिप देश के छह लाख गांवों तक पहुंचेगा। राम मंदिर आंदोलन से लेकर मंदिर निर्माण तक की यात्रा में किसी भी प्रकार की भूमिका निभाने वाले रामभक्तों को रामोत्सव कार्यक्रम में सम्मानित भी किया जाएगा। श्रीराम महोत्सव कार्यक्रम पूरे नवरात्रि चलते रहेंगे। इस दौरान जिस दिन जिस देवी की पूजा करने का विधान है, रामोत्सव कार्यक्रम में उस दिन उस प्रमुख देवी में की शक्तियों के विषय में लोगों को जानकारी दी जाएगी। लोगों को इस बात के लिए जागरूक भी किया जाएगा कि देवी की उन शक्तियों की वर्तमान समाज में क्या प्रासंगिकता है और उन्हें किस प्रकार अपने जीवन में अपनाया जाना चाहिए

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