उप्र में विधायक मनपसंद भाषा में सुन सकेंगे पूरी कार्यवाही

Uttarakhand News

(लखनऊ,UP)03अगस्त,2026.

उत्तर प्रदेश विधानसभा के आगामी सत्र में एक नया प्रयोग होने जा रहा है. पहली बार विधानसभा की कार्यवाही में ऐसा सिस्टम लागू किया जा रहा है, जिसके जरिए विधायक सदन में दिए जा रहे भाषणों को अपनी पसंद की भाषा में सुन सकेंगे. प्रत्येक सदस्य की डेस्क पर चार भाषाओं के विकल्प वाले बटन लगाए गए हैं. जिस भाषा का बटन दबाया जाएगा, उसी भाषा में संबंधित विधायक का भाषण सुनाई देगा।

विधानसभा प्रशासन ने इस व्यवस्था को आईपीएल की बहुभाषी कमेंट्री की तर्ज पर तैयार किया है. इस व्यवस्था के तहत सदन में जब कोई विधायक बोलेगा उसी समय कंट्रोल रूम में मौजूद अनुवादक उसके भाषण का तत्काल अनुवाद करेंगे और वह संबंधित भाषा में अन्य विधायकों तक पहुंचेगा. फिलहाल हिंदी, अंग्रेजी, भोजपुरी और अवधी को इस प्रणाली में शामिल किया गया है. उर्दू को जगह नहीं मिलने पर समाजवादी पार्टी ने आपत्ति जताई है. इसे लेकर राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र तीन अगस्त से शुरू हो रहा है। छह अगस्त तक मानसून सत्र की कार्यवाही चलेगी. इसमें विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होगी. अब तक विधानसभा सत्र के दौरान जो व्यवस्था लागू नहीं थी, पहली बार वह व्यवस्था भी जनप्रतिनिधियों के लिए विधानसभा में लागू की जा रही है. तकनीकी रूप से बदलती विधानसभा में इस बार कार्यवाही के दौरान जो जनप्रतिनिधि जिस भाषा में भाषण सुनना चाहेगा, सिर्फ अपनी टेबल पर लगे बटन को दबाएगा और हेडफोन में वह भाषा ट्रांसलेट होकर सुनाई देने लगेगी।

अपनी भाषाओं में सुन सकेगा सवाल-जवाब : इसका फायदा ये होगा कि अगर कोई जनप्रतिनिधि अपना भाषण या फिर कोई सवाल जवाब भोजपुरी या अवधी में कर रहा है, लेकिन अगर कोई जनप्रतिनिधि इन भाषाओं को उतना बेहतर नहीं समझ सकता, जितना की हिंदी, तो विधायक अपने टेबल पर हिंदी का बटन प्रेस करेगा, वैसे ही भोजपुरी या अवधी बोलने वाले जनप्रतिनिधि की आवाज उसको हिंदी में अनुवाद होकर हेडफोन में सुनाई देने लगेगी।

स्पीकर ने पहले ही दी थी जानकारी :
पिछले विधानसभा सत्र के दौरान विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सदन में हिंदी के अलावा अंग्रेजी, अवधी और भोजपुरी भाषा में जनप्रतिनिधियों को बोलने की छूट भी दी थी. इसके बाद उन्होंने कहा था कि आगामी विधानसभा सत्र के दौरान नई व्यवस्था लागू की जाएगी. सभी जनप्रतिनिधियों के टेबल पर इन भाषाओं के बटन लगे होंगे. उनके पास ये विकल्प होगा कि वे जिस भाषा में सामने वाले जनप्रतिनिधि का भाषण या सवाल-जवाब सुनना चाहेंगे, एक बटन दबाते ही ऐसा हो जाएगा.

सपा ने किया विरोध : समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी सरकार को यह नहीं पता कि कौन सी भाषा कहां जन्मी है। मेरठ में उर्दू भाषा जन्मी है। अपने उत्तर प्रदेश की भाषा है. लेकिन भारतीय जनता पार्टी को भाषाओं से दिक्कत है। वह इसलिए ऊर्दू को विधानसभा की कार्यवाही से बाहर रखती है. समाजवादी पार्टी समझती है हिंदी हो या उर्दू, वह हमारी अपनी भारतीय भाषाएं हैं और भारतीय जनता पार्टी को न इतिहास की जानकारी है और न ही भाषाओं की जानकारी है(साभार एजेंसी)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *