वाराणसी के सिद्धार्थ विश्वकर्मा ने इतिहास रच दिया है। वह 84 साल बाद उत्तर प्रदेश से डेविस कप में खेलने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं। सिद्धार्थ ने अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया है, जो उनकी प्रतिभा और संघर्ष का परिणाम है।
सिद्धार्थ की कहानी बहुत प्रेरणादायक है। उन्होंने 7 साल की उम्र में टेनिस खेलना शुरू किया था और तब से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने अपने पिता की इलेक्ट्रॉनिक सामान रिपेयरिंग की दुकान बंद करने के बाद भी हार नहीं मानी और अपने खेल को जारी रखा। उन्होंने दिल्ली में रहने और खुद खेलने के लिए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने के लिए दूसरे खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दी।
सिद्धार्थ ने बताया कि उन्हें कोच की सलाह और धैर्य से अभ्यास करते रहने की प्रेरणा मिली। उन्होंने वर्ष 2012 में खेलने के लिए दिल्ली आ गए और वहां कंधे में चोट लगने के बाद भी हार नहीं मानी। उन्होंने वर्ष 2018 में टॉप टेन खिलाड़ियों की सूची में आठवां रैंक हासिल किया और राष्ट्रीय चैंपियन बन गए।
सिद्धार्थ की यह उपलब्धि न केवल उनके लिए बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने साबित किया है कि अगर मेहनत और लगन से काम किया जाए तो कुछ भी असंभव नहीं है।
