नई दिल्ली, 30 सितम्बर 2025।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ब्रिक्स देशों से अपील की है कि वे बढ़ते संरक्षणवाद और टैरिफ में उतार-चढ़ाव के बीच बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली की रक्षा करें। उन्होंने यह बात संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान न्यूयॉर्क में ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में कही।
जयशंकर ने कहा कि जब बहुपक्षवाद पर दबाव होता है, तब ब्रिक्स हमेशा समझदारी और रचनात्मक बदलाव की मजबूत आवाज उठाता है। अशांत वैश्विक परिस्थितियों में ब्रिक्स को शांति, संवाद, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन का संदेश और अधिक मजबूत करना होगा।
UNSC सुधार की जरूरत
उन्होंने ब्रिक्स देशों से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में व्यापक सुधार के लिए एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील भी की। जयशंकर ने कहा कि आने वाले समय में तकनीक और नवाचार ब्रिक्स सहयोग का अगला चरण तय करेंगे। उन्होंने 2026 में होने वाली भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान भारत खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास पर विशेष ध्यान देगा। इसके साथ ही डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, स्टार्टअप्स, नवाचार और विकास सहयोग को भी मजबूत किया जाएगा।
कई देशों के विदेश मंत्रियों से मुलाकात
बैठक के दौरान जयशंकर ने सिएरा लियोन, रोमानिया, क्यूबा, ऑस्ट्रिया, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, रूस, उरुग्वे, कोलंबिया और एंटीगुआ एंड बारबुडा के विदेश मंत्रियों से मुलाकात की। उन्होंने यूएई के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से भी द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा की।
ऑस्ट्रिया की विदेश मंत्री बीटे माइनल-राइजिंगर के साथ मुलाकात में भारत और यूरोप के सामने मौजूद चुनौतियों व विकल्पों पर विचार-विमर्श हुआ। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से हुई बैठक में यूक्रेन संघर्ष, द्विपक्षीय संबंध और पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा हुई।
अन्य वैश्विक बैठकों में सक्रिय भागीदारी
विदेश मंत्री ने आईबीएसए (भारत-ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका) बैठक में हिस्सा लिया और कहा कि तीनों देशों ने यूएन सुरक्षा परिषद में बड़े सुधार की जोरदार मांग की है। इसके अलावा उन्होंने भारत-सीईएलएसी विदेश मंत्रियों की बैठक की सह-अध्यक्षता की, जिसमें कृषि, व्यापार, स्वास्थ्य, डिजिटल तकनीक, आपदा राहत और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
जयशंकर ने कहा कि भारत और सीईएलएसी देशों ने एआई, महत्वपूर्ण खनिज, अंतरिक्ष, नवीकरणीय ऊर्जा और नई तकनीकों में साझेदारी के अवसर तलाशने पर भी सहमति जताई। उन्होंने जोर देकर कहा कि बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार कर ग्लोबल साउथ की आवाज को और मजबूत बनाना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।
